हनिशा दुधे चंद्रपूर जिल्हा ग्रामीण प्रतिनिधि
महाराष्ट्र संदेश न्युज ! ऑनलाईन चंद्रपुर:- एक डॉक्टर की कोशिश किसी मरीज़ को मौत के मुह से निकाल कर ज़िंदगी की रोशनी दें सकती हैं, लेकिन उसी डॉक्टर की लापरवाही जीते जागते मरीज़ को मौत के आग़ोश में ढकेल बी सकती है चंद्रपुर के बल्लारपुर ग्रामीण सरकारी अस्पताल सें एक ऐसा मामला सामने आ रहा है जहा दीपा संपत पेरकर को डिलेवरी हेतु बालारपुर के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन ऑपरेशन में उपस्थित डॉक्टर की लापरवाही सें महिला की जान पर अब बन आई है.

मामला कुछ इस तरह है की दीपा पेरकर को दिनांक १३ सप्टेंबर को डिलेवरी हेतु बल्लारपुर के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती किया गया और कुछ दिनों बाद उसका (सीज़र) ऑपरेशन कर उसे उसकी बेटी सोपी गई. उसी के बाद ऑपरेशन के टाके की रूटीन चेकअप के लिये महिला जब भी अस्पताल जाती तो उसे टाल मटोल कर सिस्टर द्वारा ड्रेसिंग कर घर वापस भेज दिया जाता था लेकिन किसी डॉक्टर द्वारा उसके पेट में लगे हुवे टाको की जॉच ना होने सें उसके पेट के हिस्से में इन्फेक्शन और सूजन सी दिखने लगी जिसकी शिकायत उसनें ऑपरेशन में उपस्थित डॉ. मीनल मूलचन्दानी, डॉ. रामटेक से की, जिसके बाद फिरसे उसे अस्पताल बुलाकर पेट की जाच की गई और उसे डॉक्टरों द्वारा झूटीं तसलीं देकर वापस घर भेज दिया गया.
कुछ दिनों बाद दीपा के पेट में मास सड़ने की बदबू आने लगी और दीपा गंभीर रूप सें बीमार पड़ने लगी उसे आनन फ़ानन में चंद्रपुर में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी तबियत अब गंभीर बताई जा रही है वही निजी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा इस इन्फेक्शन का करण ऑपरेशन में बरती लापरवाही बताई जा रही है जिसका विरोध आज संजीवनी पर्यावरण के अध्यक्ष राजेश बेले द्वारा पत्रपरिषद में किया गया वही राजेश बेले द्वारा सरकार से अपील की जा रही है के इस प्रकरण के संबंधित डॉक्टरों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाही कर उन्हें पद से बर्खास्त किया जाए.
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